तारो की चाँदनी रात

तारो की चाँदनी रात मे देखा एक सपना था,
उस ख्वाब मे मिला मुझे कोई अपना था

लगा की गुजर जाएगी ज़िंदगी उनकी मासूमियत के साथ,
खुली जब आँख तो वही सपना बिखरा मेरा था.

टूटा सपना तो उन्हे भूल ना पाए हम,
शायद मेरे दिल को उसे याद रखना था.

अपनी हर दुआ मे माँगा मैने रब से
क्योकि बिन उसके जी पाना मुस्किल था.

हम तो “यादो के मुसाफिर” है, उनकी यादों के सहारे जी लेते
फिर भी उनको पाना सयद जिंदगी का मकसद था.

तारो की उस रात मे देखा मैने एक सपना था,
जिसमे मिला मुझे कोई अपना था.

Prajul Sahu
He is naughty but his nature is simple. He loves to listen songs and write shayries on everything. Feel the music with his words with his own shayries.
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