सोच कर इश्क नहीं किया था

दिल में बसा कर उसका चेहरा खो गया मै कही
जैसे बीच समंदर में फँस गया कोई माँझी कहीं

उसकी आँखें ही है उसकी दिल की जुबान
और अब सुनना चाहता हूँ में उसे ही हर कहीं

सोच कर इश्क नहीं किया था मैंने उससे
पर अब मेरी हर सोच में बस गयी वो हर कहीं

उनसे मिलें बिना भी हम उससे मिल लेते हैं क्यूंकि
बसी है मेरे जहाँ में उसकी ही तस्वीर हर कही

Ashish Vishwakarma
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