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सागर की कहानी

सागर की कहानी, सागर वासियों की जुबानी…

मैंने जाना सागर आकर, हृदय यहाँ लोगों के सागर।

सागर सब भांति महान, ये बुंदेलखंड की जान।

बंबई में भी सागर प्यारा, पर ये मीठा और वो खारा।

पीलीकोठी में सजा है दादा दरबार, बोलो पहलवान बब्बा की जय-जयकार।

मोतीनगर चौराहे से जाकर अंदर, पूजिये भूतेश्वर शिव-शंकर।

अंजनी माता के बालाजी, मंगलगिरी पर हैं बालाजी।

मकरोनिया में है बना शिव-शक्ति धाम, शिव-शक्ति के वरदाता सागर नगर तमाम।

बारह ज्योतिर्लिंग यहाँ हैं, ऐसे तीर्थ और कहाँ हैं।

हैं सागर में जैनों के ठाठ, एक लाख यहाँ पर जैन हैं और मंदिर साठ।

झील यहाँ पर लाखा बंजारा, जल नहीं मिला तो खोदकर हारा।

बेटे-बहू का दे दिया तालाब के लिए बलिदान, इसलिए सागर महान।

जमना मिठ्या का नाम बड़ा है, चिरोंजी की बर्फी का दाम बड़ा है।

सागर में प्रसिद्ध है गुजराती नमकीन, सागर वाले है बड़े नमकीन के शौकीन।

सागर की पहचान हैं हरीसिंह गौर, हरीसिंह जी गौर जैसा नहीं कोई और।

यहीं पर जन्मे कवि पदमाकर, नमन करूँ उन्हें मैं जाकर।

सागर की महिमा है भारी, शब्दों में नहीं जाये उतारी।

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