Please download our Online Radio App from Google Play Store. Click Here. close ×
+

मुस्कुराते थे साथ मिलकर

दिल में बसा कर उसका चेहरा खो गया मै कही
मेरी सांसो से उसकी आहट जाती ही नही
उसकी मुस्कुराहट में मेरी ख़ुशी है कही न कही
कभी वक़्त तो कभी किस्मत सही होती नही
मुस्कुराते थे साथ मिलकर ये भुला पायेगे न कभी
जब तक जिस्म में है जान मेरी हर साँस यारी निभाती रहेगी
दूर होकर भी कभी दूर होंगे नही
और अब कहने को मेरे पास शब्द नही
बसी है मेरे जहाँ में उसकी ही तस्वीर हर कही

Akanksha Jain
She is shy but not her words, her shayri creates difference, her shayries are straight from heart to yours.
Share : facebooktwittergoogle plus
pinterest



No Response

Leave us a comment


No comment posted yet.

Leave a Reply