क्या गलत और क्या है सही

दिल में बसा कर उसका चेहरा खो गया मै कही
अब दिल इजाजत मांगता उससे मिलने को हर कहीं

दिल नें कर ली उससे ही मुहब्बत बिन पूछे मुझसे
फिर कभी सोचा नहीं की क्या गलत और क्या है सही

मैं मिल भी लेते उससे रोज मेरे ख्वाबों में
पर बिन उसके अब नींद भी आती नहीं

दिल तड़प जाता है उससे मिलने को हर पल क्यूंकि
बसी है मेरे जहाँ में उसकी ही तस्वीर हर कही

Ashish Vishwakarma
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