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कितनी अँधेरी है यॅ रात

तू आपने दर से उठा दे तो किधर जाऊँ
जब झोली तू ही खाली कर दे तो किधर जाऊँ
लाई थी कस्ती में लहरो से चीर कर
पर तू किनारे पर ही डूबा दे तो मैं किधर जाऊँ
हाँ मैं ग़रीब हूँ साहिब बोलो कैसे संभल जाऊँ

कितनी अँधेरी है यॅ रात मुरदो वाली
जहाँ क़ुबूल हुई सबकी दुआ सारी
वहाँ आँसू का दामन भीगा कर मैं घर आई
हाँ मई ग़रीब हू साहिब बोलो किस से मांग के दुआ लाऊँ

दामन है भीगा बैठे बैठे
आंशु है बहाए चलते चलते
आवारा हू फिरूं मैं गलियां गलियां
एक आशयानें की चाह में जाने कितने बरसो
हाँ ग़रीब हू साहिब बोलो कैसे अश्याम बनू

ये दर्द-ए-सफ़र रहने दे
मैं हार गयी चलते चलते
ये दुनिया की रीत है जो दिल का अमीर है
वो पैसे से ग़रीब है

बस कुछ लब्ज ही तो है मेरे पास
वो ही खर्च कर दूं तो कैसे यह फलसफा बया करूँ
रहने दे दिल-ए-नादान तू रहने ही दे
कों सुनने गा तेरी तू इसे कोरा कागज रहने ही दे
हाँ मई गरीब हूँ साहिब बोलो कैसे संभाल जाऊं

Harshita Shrivastav
Intelligent Shayar
She is intelligent, she is pretty, she has different prospective on everything... so enjoy her views on everything by her shayries...
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