करीब हूँ मैं सागर से

याद आती हैं बहुत मुझे अपने गाँव की गलियाँ…

बारिश के बाद की भीनी सी खुश्बू और दोस्तों की रंग रेलियाँ …

दूरी ने एहसास दिलाया कितने करीब हूँ मैं सागर से…

कोई आकर दो बूँद देदे इन प्यासी यादों को उन गागर से…

अपना गाओं अपने लोग अपनी वो कही अनकही दास्तान…

कोई लौटा दे वो बचपन की हँसी और दिल की मुस्कान…

साथ चले जिन राहों पे दोस्तों के साथ…

कहीं ठोकर तो कहीं संभलकर याद आतें है वो हाथ…

भारत की चाट, कुबेर के छोले भतूरे, पीली कोठी पे सर झुकना…

स्कूटी पे यूँही घूमना, CDS की छत पर बैठना तो बालाजी मे दर्शन करना…

पल पल याद हैं बरसों के वो दिन…

मेरे गाओं मेरे अपने शहर के दिन…

Ratna Tiwari
She is dynamic, gregarious and thoughtful. She loves to be with her memories. she always wear a smile on her face. Feel the magic of her words in her shayries...
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