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गरीब सारा जहाँ हैं

किसी ने पूछा मुझसे एक रोज बड़ी मासूमियत से
की गरीब कौन जिसे प्यार या जिसे रोटी नहीं मिलती ?

मैंने कहा असलियत में गरीब सारा जहाँ हैं
जिन्हें दिन का चैन और रातों की नींद नहीं मिलती

गरीब वो नहीं जिन्हें दो वक़्त की रोटी नहीं मिलती
पेट भर खाकर भी सोने वालों को यहाँ नींद नहीं मिलती

तिल टिल तड़प कर रहते हैं यहाँ अक्सर लोग
कुछ को आसमान तो कुछ को जमीन नहीं मिलती

मेरे समझ में आती नहीं अब ये बेबस दुनिया
क्यूंकि इसमें कभी अब मुझे सादगी नहीं दिखती

जब छोटे थे तो माँ की गोदी में संसार था
अब इतने बड़े संसार में वो शांति नहीं मिलती

छोटी छोटी बातों में बड़ी बड़ी खुशिया ढूंड लेते थे
अब तो इन खुशियों में वो गर्माहट नहीं मिलती

पैसे से दुनिया खरीद लेने के जो दम रखते हैं
उनके दिल को खुश रखने वाली खुशियाँ नहीं मिलती

सुबह निकलते हैं घर से नए सपनो को बुनकर
पर सपनों को पूरा करने की हिम्मत नहीं मिलती

गरीब वो नहीं जिन्हें दो वक़्त की रोटी नहीं मिलती
पर जिन्हें दो पल मुस्कुराने की खुशियाँ नहीं मिलती

Ashish Vishwakarma
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