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दिल में बसा कर

दिल में बसा कर उसका चेहरा खो गया मैं कहीं
यूँ तो हर ज़िक्र में होता है उसका यकीन
याद उसे ही करता हूँ अब खुश हूँ या गमहीं
ढूँढ ही लेता हूँ वो रास्ता जिसकी मंज़िल हो तुम्ही
लाख कोशिशों से पाया है उसे की होता नहीं यकीन
करता हूँ रब से अब यही इलतेज़ा ना बिछड़ेंगे कभी
मिल गयी है वो जिसकी कमी थी अरसों से इस ज़िन्दगी में
बसी है मेरे जहाँ में उसकी ही तस्वीर हर कहीं

Manish Vishwakarma
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