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दुनिया ने ये कैसी रीत बनाई हैं

कभी सोच कर देखा नहीं मैंने।

दुनिया ने ये कैसी रीत बनाई हैं
माँ बाप के लिए बेटी क्यों पराई हैं।

जिनकी उंगली पकड़ कर चलना सीखा
करके बड़ा कहते है तू पराई हैं।

कैसे भूलू घर के आँगन को बाबुल
मेरे बचपन की यादे जिसमें समाई हैं।

माँ के आंचल की छाओं मे पली बड़ी
कैसे छोड़ सकती हूँ मायके की गली।

जिस आँगन मे अपना बचपन जिया
क्यों उस देहलीज़ से होती बिदाई हैं।

क्यों बेटी का रिस्ता इतना अजीब होता हैं
क्या बस यही हम बेटियों का नसीब होता हैं।

कभी सपने मे भी नहीं सोचा था मैने
ज़िन्दगी मे इक ऐसा भी मोड़ आएगा

सात फेरो से जन्मों का बंधन बंध जायेगा
और खून के रिस्ता अपना पीछे रह जायेगा।

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काश वो मेरे हमसफ़र बन जाते

काश मेरे सारे सपने सच हो जाते
वो खुशियों से मेरा दामन भर जाते
खुदा से दुआ में माँगा था जिन्हें हमने
काश वो मेरे हमसफ़र बन जाते

जिंदगी के फलसफा कुछ और ही होता
अगर रंगत उनके चेहरे की हम हो जाते
ना लड़ते हम अपने आंशुओं से अक्सर
अगर मेरे सारे सपने हकीकत हो जाते

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बिन उसके जिंदगी सोची नहीं मैंने

कभी सोच कर देखा नहीं मैंने
पाकर प्यार अपना खोया नहीं मैंने|
वादे किये पूरे हमने साथ मिलकर
बिन उसके जिंदगी सोची नहीं मैंने|

उससे शुरू होती साँसे मेरी हर पल
जिंदगी को छोड़कर जिया नहीं मैंने|
हर पल उसकी यादों मैं खोया रहा मैं
बातों को याद कर सोया नहीं मैंने|

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मैं अकेला तो नहीं यारो

इस दुनियाँ के मेले में कुछ-2 ज़िंदा दिल तो है ।
कुछ गम हैं और कुछ खुशियाँ कुछ के सपने भी तो हैं ।।

सब प्यार के भूखे हैं मानव
बस प्यार बॉटने आते हैं ।
जो दो मीठे शब्द सुने तत्पर ही खड़े हो जाते हैं ।।

न ख्याल उन्हें मरने का रहे
बस साथ निभाना आता है ।
चाहे किसी भी कीमत पर
बस बढ़ते रहना आता है ।।

ये दोस्त,भाई, रिस्तेदार सही
मुसाफिर भी साथ निभाता है ।
हिम्मत कर कदम उठा तू भी
हर पत्ता साथ निभाता है ।।

मैं अकेला तो नहीं यारों,
इस दुनियां के मेले में
कुछ गम और कुछ खुशियाँ हैं
तो कुछ जिंदा दिल भी तो हैं।।

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गरीब सारा जहाँ हैं

किसी ने पूछा मुझसे एक रोज बड़ी मासूमियत से
की गरीब कौन जिसे प्यार या जिसे रोटी नहीं मिलती ?

मैंने कहा असलियत में गरीब सारा जहाँ हैं
जिन्हें दिन का चैन और रातों की नींद नहीं मिलती

गरीब वो नहीं जिन्हें दो वक़्त की रोटी नहीं मिलती
पेट भर खाकर भी सोने वालों को यहाँ नींद नहीं मिलती

तिल टिल तड़प कर रहते हैं यहाँ अक्सर लोग
कुछ को आसमान तो कुछ को जमीन नहीं मिलती

मेरे समझ में आती नहीं अब ये बेबस दुनिया
क्यूंकि इसमें कभी अब मुझे सादगी नहीं दिखती

जब छोटे थे तो माँ की गोदी में संसार था
अब इतने बड़े संसार में वो शांति नहीं मिलती

छोटी छोटी बातों में बड़ी बड़ी खुशिया ढूंड लेते थे
अब तो इन खुशियों में वो गर्माहट नहीं मिलती

पैसे से दुनिया खरीद लेने के जो दम रखते हैं
उनके दिल को खुश रखने वाली खुशियाँ नहीं मिलती

सुबह निकलते हैं घर से नए सपनो को बुनकर
पर सपनों को पूरा करने की हिम्मत नहीं मिलती

गरीब वो नहीं जिन्हें दो वक़्त की रोटी नहीं मिलती
पर जिन्हें दो पल मुस्कुराने की खुशियाँ नहीं मिलती

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वो गरीब है

वो गरीब है!
मुझे पता है
आपको पता है
हर कोई जानता है
उसे भूक लगी है!
वो खुद सबसे अधिक जानता है
जितना की किसी और को पता है।

क्या वो गरीब है?
मुझे पता नहीं
क्या उसे भूक लगी है?
मुझे पता नहीं
लेकिन मुझे पता है
वो जीवित है
कुछ सम्मान के साथ, हँसो मत!
मैं सम्मान की बात कर रहा
सम्मान जो तुम जानते हो वो नहीं
उसका अपने प्रकार का

वो हमसे विनती करता है ।
पैसे के लिए नहीं, ना ही कपडे के लिए
लेकिन उसे छोड़ने क लिये, उसकी गरीबी के साथ अकेला
और यह उसके जीवन को बदलने के लिए नहीं या उस पर दया करने कइ लिए,
यह अफ़सोस की बात नहीं है जो वह चाहता है।

उसे शर्माने की जरुरत नहीं है
ना ही कोई रियायत की जरुरत है
या विशेष अधिकार की
लेकिन सभी को उसकी मदद करनी चाहिए
अपनी पूरी छमता के साथ
हमे अपने आप पर गर्व करना चाहिये और उस पर भी
और वो भी तुम पर गर्व महसूस करेगा वो भी खुसी के साथ ।

इसलिए हमे एक साथ हाथ से हाथ मिला शामिल होना चाहिए
और गर्व करना चाहिए एक दूसरे पर, एक नयी शुरुवात के लिए उस गरीब के लिए।।

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