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वो बचपन के दिन और बारिश का मौसम

वो बचपन के दिन और बारिश का मौसम आज भी याद है !
छोटी छोटी नदियो मे, अपनी कस्ती तैराना आज भी याद है !!
बादल के गरजने,बिजली के चमकने पर शोर मचाना आज भी याद है !
मौज- मस्ती की होड़ मे, पुरानी रंजिशे भुलाना आज भी याद है !!
भीगते नाचते कीचड़ की गलियो मे दौड़ लगाना आज भी याद है !
कीचड़ वाले पानी मे यारो को भिगोना आज भी याद है !!
मंजिले पाने की होड़ मे बचपन की यादो का अफ़शाना आज भी खास है
ना जाने कहाँ गया वो बचपन,कहाँ गयी वो बारिशे बस उन यादो का तराना पास है !!

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खो जाता हूँ अक्सर उसके ख्यालों में

उसकी जुल्फें और उसका चेहरा
बातों में उसकी मिठास का पहरा
खो जाता हूँ अक्सर उसके ख्यालों में
जैसे आकाश में उड़ता कोई पपीहरा

खुशबू से महकता उसका तन मन
उसे देख मैं उसकी आखों में ठहरा
प्यार हो जाता मुझे हर बार देखकर
उसका रंग मानो सोने सा सुनहरा

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उसकी मुस्कुराहट मे है जादू

मैं जीता रहा उसकी यादों मे
गुम होता रहा उसकी बातों मे

उसकी मुस्कुराहट मे है जादू
जो करती है मुझको बेकाबू

उसकी आँखों मे है नूर
और वो है मेरी हूर

मैं चलता रहा उसके वादों मे
और रोता रहा सरी रातों मे

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उसकी यादों का कारवां

शरारत उसकी और शरमाना क्या गजब था
बातों में उसकी मेरा नाम आना बेसबब था
खुदा ने मोहलत न दी कभी उससे मिलने को
पर इन्तजार में तडपना भी लगता शानदार था

उसकी यादों के कारवां में चलता चला गया में
एक गहरे दरिया में फश गया हो माँझी जैसे
हर पहर हर वक़्त में वो ही याद आती है
यादों के भँवर में फश गया हो समय जैसे

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मुझे अब तुम्हारी याद नहीं आती

मुझे अब तुम्हारी याद नहीं आती…

कभी सोच कर भी देखा नहीं था मैंने की मैं तुम्हारे बिना जी पाउँगा
पर ज़िन्दगी ने सब सीखा दिया और अब मुझे तुम्हारी याद नहीं आती…

गर तुम सोच रही हो कि तेरे जाने के बाद टूट गया हूँ
मैं तो बता दूँ कि मुझे तुम्हारी याद तक नहीं आती…

बस सुबह सब से पहले तेरी तस्वीर देखना शगल है मेरा
पर मुझे अब तुम्हारी याद नहीं आती…

हर शरारत मेरी मैं अब भी तुझपे सबसे पहले आज़माना चाहता हूँ
पर हाँ मुझे अब तुम्हारी याद नहीं आती…

घूमते घूमते भीड़ में ना जाने क्यूं चेहरा तेरा तलाशने लगता हूँ मैं
पर एक बात तो पक्की है कि मुझे अब तुम्हारी याद नहीं आती…

मुझसे मिलने भी चली आती हो तुम कभी ख्यालों में तो कभी ख्वाबों मे पर
मुझे फ़िर भी अब तुम्हारी याद नहीं आती…

मैं जानता हूँ कि ना भूला पाऊँगा मैं तुझ को कभी
पर मुझे अब तुम्हारी याद नहीं आती…

मुझे अब तुम्हारी याद नहीं आती…
मुझे अब तुम्हारी याद नहीं आती ।

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कभी सोच कर देखा नहीं मैने

कभी सोच कर देखा नहीं मैने

सूरज की रोशनी तेज है या चाँद की चाँदनी
अंधेरे को चीरने वाला बड़ा या दिन मे राह दिखाने वाला
कभी सोच कर देखा न मैने
और इस दुनिया को ऐसे समझा ना मैने

अपनी बेटी कहते जिसे बड़ा किया माँ पापा ने
एक नया बंधन जुड़ने पर पराई क्यूँ हो जाती है
कभी सोच कर देखा नहीं मैने
और इस रीत को कभी अपनाया ना मैने

खुद के आँसू छुपा कर बड़ा करती सबकी माँ
बड़े होकर उन्ही बच्चों के लिए तरस जाती है वो माँ
कभी सोच कर देखा नहीं मैने
और इस रिश्ते की गहराई को जाना ना मैने

ऐसे ही सवाल आते हैं आज मन में
बिन जवाब के रह जाते हैं ये अधूरे
कभी सोच कर देखा ना मैने
और आज आपके मन तक पहुँचाया मैने

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