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मैं जीती रही उसकी यादों में

मैं चाहती रही उसे खुद से भी ज्यादा
वो मेरी चाहत को अपनी जिंदगी से मिटाता गया|

मैं देती रही हर कसम पर साथ उसका
वो मेरी प्यार की कस्ती को सागर में डूबाता गया|

मैं करती रही हर मोड़ पर इंतज़ार उसका
वो मेरी जिंदगी से हर पल दूर जाता गया|

मैं जीती रही उसकी यादों में और
वो मेरी यादों को अपने दिल से भूलाता गया|

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वो बन गए जान महफ़िल की

वो जगमगा रहा हैं दिया सा
मैं जल रही हूँ बत्ती सी|

वो महका सा हैं खुशबू सा
मैं मुरझा रही हूँ फूलो सी|

वो बन गए जान महफ़िल की
और मैं खो रही हूँ तन्हाई मैं|

वो खुश जी रहा हैं अपनी दुनिया मैं
और मैं जीती रही उसकी याद मैं|

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दुनिया की इस भीड़ में

दुनिया की इस भीड़ में कहीं मे अकेला तो नहीं यारो।

जिस खुदा के दर पर हमेशा भीड़ होती हैं
खुदा के दरवाजे पर बैठे उस गरीब से पूछो
कि लोगों की भीड़ के बीच मे भी कितना अकेला हैं ।

चाँद जो पूरी पृथ्वी पर अपनी चांदनी बिखेरता हैं
आसमान मे छुपे उस चाँद से पूछो
जो हजारों तारो के बीच मे होते हुए भी कितना अकेला हैं।

माँ बाप जो सारी उमर अपने परिवार की देख भाल करते हैं
उन माँ बाप से पूछो जो बुढ़ापे में अपने बच्चों के सहारे के बिना कितने अकेले हैं।

बच्चे जो घर मे खुशियां लाते है
जिनके कारण घर मे रोनक रहती हैं
उन अनाथ बच्चों से पूछो जो अपनो के प्यार के बिना कितने अकेले हैं।

अमीर जिसके पास सब कुछ होने के बाबजूद भी
जब वह अपनी खुशियाँ नहीं खरीद पाता
उस व्यक्ति से पूछो जिसके पास सब कुछ होते हुए भी
वह अपनी खुशियो के बिना कितना अकेला हैं।

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