एक सपनो का शहर

एक सपनो का शहर मेरे अरमानो का शहर
मंदिर से मस्जिद तक का हरी वादियों का शहर

जान से प्यारा मुझे मेरा दिल है मेरा शहर
कभी गर्मी का मज़ा तो सुहाने मौसम का पहर

तपती धूप में भी हरे भरे पेड़ो का शहर
पानी में चलती छोटी छोटी नाव सा मेरा नगर

राधे का मंदिर और क़ुरान सी मस्जिद का शहर
हर धर्म को मानता वाला सदभावना की लहर

बेहतर शिक्षा से उँचे उड़ते अरमानो का शहर
नये ख्वाबों को नयी आज़ादी देता यहाँ का हर घर

राजघाट का बाँध यहाँ लगता है सबको सुंदर
सबकी प्यास बुझाने वाला अपना ये प्यारा शहर

भारत माता के लाल यहाँ बनते हैं वीर और निडर
देश की रक्षा के लिए नये सपूतों का शहर

जमना की मिठाई, गुजराती नमकीन और जलेबी का चक्कर
बुन्देलखंडी की मिठाश और बधाई का शहर

पहाड़ों से झांकता सूरज और खेल के मैदानों का शहर
मेरा प्यारा सागर मेरा अपना और सबका शहर

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मेरा अपना सागर

ये हे मेरा अपना सागर सबसे सुंदर मेरा सागर…
छोटी छोटी यहा की गलिया यहाँ के झरने यहाँ की नदियाँ….

नदियों से ही बनता सागर ये हे मेरा प्यारा सागर…
यहाँ की हर बात निराली बुन्देलखंडी यहा की बड़ी निराली…..

सागर की आँखो मे देखा बसता एक परिवार हे…
हर उत्सव हर त्योहार मे अलग इसका अंदाज़ हे…

ये हे मेरा अपना सागर सबसे सुंदर मेरा सागर….

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करीब हूँ मैं सागर से

याद आती हैं बहुत मुझे अपने गाँव की गलियाँ…

बारिश के बाद की भीनी सी खुश्बू और दोस्तों की रंग रेलियाँ …

दूरी ने एहसास दिलाया कितने करीब हूँ मैं सागर से…

कोई आकर दो बूँद देदे इन प्यासी यादों को उन गागर से…

अपना गाओं अपने लोग अपनी वो कही अनकही दास्तान…

कोई लौटा दे वो बचपन की हँसी और दिल की मुस्कान…

साथ चले जिन राहों पे दोस्तों के साथ…

कहीं ठोकर तो कहीं संभलकर याद आतें है वो हाथ…

भारत की चाट, कुबेर के छोले भतूरे, पीली कोठी पे सर झुकना…

स्कूटी पे यूँही घूमना, CDS की छत पर बैठना तो बालाजी मे दर्शन करना…

पल पल याद हैं बरसों के वो दिन…

मेरे गाओं मेरे अपने शहर के दिन…

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सागर की याद

आज मौसम मे एक खुमारी छाई है

जिसने बीते हुए कल की याद दिलाई है

गुजारा था हमने बचपन जिन गलियो मे

फिर उन गलियो मे बारिस ने सेज सजाई है

करते थे सैर जिस कस्ती मे हर शाम

उस कस्ती को देख आँख भर आई है

बैठे थे जिस तस्वीर मे हम अपनो के साथ

उस तस्वीर ने फिर हमें सागर की याद दिलाई है

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सागर एक अनोखा शहर

कुछ खास है इसमें, एक अहसास है इसमें ।

पता नहीं यहाँ क्यों जो भी आता है।

सागर के दिल में बसता चला जाया करता है ।।

भाषा है बुन्देली सुनकर दिल गदगद है करता ।

चाट चौपाटी और खाने के लाजवाब स्वाद में दिल मरता ।।

सागर में एक है CDS जिसमे रहते दिलवाले ।

बातें और मस्ती उनकी हरदम याद दिलाती ।।

हर दम एक नया सवेरा लाता नयी खुशहालि ।

सागर एक अनोखा शहर।।

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सागर की कहानी

सागर की कहानी, सागर वासियों की जुबानी…

मैंने जाना सागर आकर, हृदय यहाँ लोगों के सागर।

सागर सब भांति महान, ये बुंदेलखंड की जान।

बंबई में भी सागर प्यारा, पर ये मीठा और वो खारा।

पीलीकोठी में सजा है दादा दरबार, बोलो पहलवान बब्बा की जय-जयकार।

मोतीनगर चौराहे से जाकर अंदर, पूजिये भूतेश्वर शिव-शंकर।

अंजनी माता के बालाजी, मंगलगिरी पर हैं बालाजी।

मकरोनिया में है बना शिव-शक्ति धाम, शिव-शक्ति के वरदाता सागर नगर तमाम।

बारह ज्योतिर्लिंग यहाँ हैं, ऐसे तीर्थ और कहाँ हैं।

हैं सागर में जैनों के ठाठ, एक लाख यहाँ पर जैन हैं और मंदिर साठ।

झील यहाँ पर लाखा बंजारा, जल नहीं मिला तो खोदकर हारा।

बेटे-बहू का दे दिया तालाब के लिए बलिदान, इसलिए सागर महान।

जमना मिठ्या का नाम बड़ा है, चिरोंजी की बर्फी का दाम बड़ा है।

सागर में प्रसिद्ध है गुजराती नमकीन, सागर वाले है बड़े नमकीन के शौकीन।

सागर की पहचान हैं हरीसिंह गौर, हरीसिंह जी गौर जैसा नहीं कोई और।

यहीं पर जन्मे कवि पदमाकर, नमन करूँ उन्हें मैं जाकर।

सागर की महिमा है भारी, शब्दों में नहीं जाये उतारी।

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