बेटियां गरीब की

बेटियां गरीब की जवान हो गयी ।
बदकिस्मती उसकी कदरदान हो गयी ।
गमो की दूप उसपे मेहरबान हो गयी ।
सितम उस पर कुदरत ने यह ध दिया ।
बेटियां गरीब की जवान हो गयी ।
अरमान पिले करे हाथ बेटी के वह ।
कैसे फ़र्ज़ अपना यह पूरा करे वह ।
पाई बांध चुनरी में हैं जिनकी बेशुमआर ।
उन बेटियो की शादी कैसे रचाये वह ।
ताने देता हैं सब कोई समझता नहीं ।
दर्द गरीब बाप का किसी को दीखता नहीं ।
आज पूछता हैं वह बाप एक सवाल इस समाज से ।
क्या गरीब के घर जनम लेना उसकी बेटियो का पाप था ।
बाप की यह हालत कब तक देखती बेटियां ।
वह भी खुद्दार बाप की थी बेटियां ।
जब सब्र का प्याला उनके भर गया ।
आँसू बाप की आखो में न देखा गया ।
एक साथ चढ़ गयी फसी बेटियां ।
किसने मार उन्हें कौन ज़िम्मेदार हैं ।
क्यू गरीब की बेतिया से तुम्हे नहीं प्यार हैं ।
सीने लगाकर पली थी उसके आँगन की कलियाँ थी वह ।
मर गयी आज तीनो कुदरत भी हमपे
शर्मसार हैं हो सके तो किसी गरीब बाप का सहारा बनना
मुसीबत के तूफ़ान में घिरे किसी घर का किनारा बनना

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