वो बचपन के दिन और बारिश का मौसम

वो बचपन के दिन और बारिश का मौसम आज भी याद है !
छोटी छोटी नदियो मे, अपनी कस्ती तैराना आज भी याद है !!
बादल के गरजने,बिजली के चमकने पर शोर मचाना आज भी याद है !
मौज- मस्ती की होड़ मे, पुरानी रंजिशे भुलाना आज भी याद है !!
भीगते नाचते कीचड़ की गलियो मे दौड़ लगाना आज भी याद है !
कीचड़ वाले पानी मे यारो को भिगोना आज भी याद है !!
मंजिले पाने की होड़ मे बचपन की यादो का अफ़शाना आज भी खास है
ना जाने कहाँ गया वो बचपन,कहाँ गयी वो बारिशे बस उन यादो का तराना पास है !!

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मुहब्बत खुदा की नेमत है

 

 

अगर दुनिया मे मुहब्बत ना होती !
तो शायद इंसान मे इन्सनियत न होती !!

क्युकी मुहब्बत खुदा की वो नेमत है !
जो इंसान को खुदा बना देती है !!

काश एसा हो जाता कि मेरे पास दुनिया की सारी दौलत होती !
और इससे दुनिया के लिये मुहब्बत और अमन खरीद लेते !!

जिससे दुनिया मे केवल अमन और सुकून होता !
काश की ये मेरा सपना सच हो जाता!!

 

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मुहब्बत की गुजारिश

यूँ ही अजनबी राहो मे इन आंखो ने उनसे शरारत कर ली !
इस तरह हमने दिल ही दिल मे उनसे मुहब्बत कर ली !!

बयाँ किया हाल ए दिल उनसे भी मुहब्बत की गुजारिश कर दी !
कुछ गुफ्तगू आंखो से की कुछ लफज़ो मे बयाँ कर दी !!

उन्होने मांज्ही बनकर प्यार की कस्ती मंज़िल पार कर दी !
चल निकला मुहब्बत का कारवा अपना और ज़िंदगी उन के नाम कर दी!!

उन्होने मुझे अपना बनाकर मेरी झोली खुशियो से भर दी!
शुक्र है रब का जिसने उन्हे हमे देकर मेरी दुआओ को मन्जूरी दे दी!!

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ज़िंदगी की जंग ने हराया

आज मैने एक गरीब को ज़िंदगी को तरस्ते देखा है..
गरीबी की आग मे जलते-सुलगते देखा है ..

ज़िंदगी की जंग ने हराया उसे..
वक्त की मार ने मारा है उसे..
एक खुशी की आश मे उस गरीब को तरस्ते देखा है..
उसे गरीबी की आग मे जलते सुलग्ते देखा है…

उस गरीब माँ की आखो मि उदासी छायी है ..
जिसके बच्चो ने कई रोज न रोटी खाई है..
मैने उन नन्हे मुन्नो को रोते बिलख्ते देखा है..
आदमी को गरीबी की आग मे जलते सुलग्ते देखा है..

ऐ खुदा, उस वन्दे पर रहम करना..
उसे गरीबी के नरक से उबार देना..
उस गरीब ने अपनो को भूख से मरते देखा है..
आदमी को गरीबी की आग मे जलते सुलग्ते देखा है..

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उनकी यादों के भँवर में

दिल मे बसा कर उसका चेहरा खो गया मे कही..
उनकी यादों के भँवर मे गुम हो गया मे कही..

तेरे ही दीदार से मुकम्मल होती है मेरी आंखे..
तेरे ही एहसास ने बिखेरी है मुहब्बत दिल मे हर कही..

दिल की गहराइ मे वो उतर गई है इस कदर..
जैसे खुदा की रहमत का शुरूर फैला है हर कही..

उसकी हर अदा पर कुर्बान कर दू अपनी ज़िंदगी..
बसी है मेरे जहाँ में उसकी ही तस्वीर हर कहीं

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