Please download our Online Radio App from Google Play Store. Click Here. close ×
+

मैं जीती रही उसकी यादों में

मैं चाहती रही उसे खुद से भी ज्यादा
वो मेरी चाहत को अपनी जिंदगी से मिटाता गया|

मैं देती रही हर कसम पर साथ उसका
वो मेरी प्यार की कस्ती को सागर में डूबाता गया|

मैं करती रही हर मोड़ पर इंतज़ार उसका
वो मेरी जिंदगी से हर पल दूर जाता गया|

मैं जीती रही उसकी यादों में और
वो मेरी यादों को अपने दिल से भूलाता गया|

Share : facebooktwittergoogle plus
pinterest

प्यार करने की गुजारिश

किसी को प्यार करो इतना की
किसी और से प्यार करने की गुजारिश न हो।

किसी को चाहो इतना की
किसी और को चाहने की मोहलत न हो।

किसी को सताओ इतना की
किसी और से शरारत करने की आरजू न हो।

किसी को याद करो इतना की
किसी और को याद करने का कारवां न हो।

Share : facebooktwittergoogle plus
pinterest

दुनिया ने ये कैसी रीत बनाई हैं

कभी सोच कर देखा नहीं मैंने।

दुनिया ने ये कैसी रीत बनाई हैं
माँ बाप के लिए बेटी क्यों पराई हैं।

जिनकी उंगली पकड़ कर चलना सीखा
करके बड़ा कहते है तू पराई हैं।

कैसे भूलू घर के आँगन को बाबुल
मेरे बचपन की यादे जिसमें समाई हैं।

माँ के आंचल की छाओं मे पली बड़ी
कैसे छोड़ सकती हूँ मायके की गली।

जिस आँगन मे अपना बचपन जिया
क्यों उस देहलीज़ से होती बिदाई हैं।

क्यों बेटी का रिस्ता इतना अजीब होता हैं
क्या बस यही हम बेटियों का नसीब होता हैं।

कभी सपने मे भी नहीं सोच था मैने
ज़िन्दगी मे इक ऐसा भी मोड़ आएगा

सात फेरो से जन्मों का बंधन बंध जायेगा
और खून के रिस्ता अपना पीछे रह जायेगा।

Share : facebooktwittergoogle plus
pinterest

उसका वादा हैं पिज़्ज़ा जैसा

उसका वादा हैं पिज़्ज़ा जैसा
कुछ खट्टा कुछ मीठा सा

Cheese जैसी बाते उसकी
Veg जैसा उसका गुस्सा
पनीर जैसा उसका दिल
Hotel जैसा उसका बिल

Butter जैसे ख्वाब उसके
Platinum जैसे उसके सपने
Paradise जैसी उसकी यादे
Dominos जैसा मिलना उसका

उसका वादा हैं Pizza जैसा
कुछ खट्टा कुछ मीठा सा⁠⁠⁠⁠

Share : facebooktwittergoogle plus
pinterest

दुनिया की इस भीड़ में

दुनिया की इस भीड़ में कहीं मे अकेला तो नहीं यारो।

जिस खुदा के दर पर हमेशा भीड़ होती हैं
खुदा के दरवाजे पर बैठे उस गरीब से पूछो
कि लोगों की भीड़ के बीच मे भी कितना अकेला हैं ।

चाँद जो पूरी पृथ्वी पर अपनी चांदनी बिखेरता हैं
आसमान मे छुपे उस चाँद से पूछो
जो हजारों तारो के बीच मे होते हुए भी कितना अकेला हैं।

माँ बाप जो सारी उमर अपने परिवार की देख भाल करते हैं
उन माँ बाप से पूछो जो बुढ़ापे में अपने बच्चों के सहारे के बिना कितने अकेले हैं।

बच्चे जो घर मे खुशियां लाते है
जिनके कारण घर मे रोनक रहती हैं
उन अनाथ बच्चों से पूछो जो अपनो के प्यार के बिना कितने अकेले हैं।

अमीर जिसके पास सब कुछ होने के बाबजूद भी
जब वह अपनी खुशियाँ नहीं खरीद पाता
उस व्यक्ति से पूछो जिसके पास सब कुछ होते हुए भी
वह अपनी खुशियो के बिना कितना अकेला हैं।

Share : facebooktwittergoogle plus
pinterest

उसका जादू इस कदर

दिल मैं बसा कर उसका चेहरा खो गयी मैं कहीं..
हर तरफ उसका मुस्कुराता चेहरा नज़र आए हर कहीं..

उसका जादू इस कदर हम पर छाने लगा..
खुदा से ज़्यादा नाम उसका जुबा पर आने लगा..

देख कर उसको हम जमाने को भी भूलने लगे..
बहती हवाओं की तरह हम उसकी याद मे झूलने लगे..

अब तो हाथों की लकीरों मे भी उसका नाम नज़र आए हर कहीं
क्योकि… बसी हैं मेरी जहाँ मैं उसकी ही तस्वीर हर कहीं….

Share : facebooktwittergoogle plus
pinterest

1 2