मुझे अब तुम्हारी याद नहीं आती

मुझे अब तुम्हारी याद नहीं आती…

कभी सोच कर भी देखा नहीं था मैंने की मैं तुम्हारे बिना जी पाउँगा
पर ज़िन्दगी ने सब सीखा दिया और अब मुझे तुम्हारी याद नहीं आती…

गर तुम सोच रही हो कि तेरे जाने के बाद टूट गया हूँ
मैं तो बता दूँ कि मुझे तुम्हारी याद तक नहीं आती…

बस सुबह सब से पहले तेरी तस्वीर देखना शगल है मेरा
पर मुझे अब तुम्हारी याद नहीं आती…

हर शरारत मेरी मैं अब भी तुझपे सबसे पहले आज़माना चाहता हूँ
पर हाँ मुझे अब तुम्हारी याद नहीं आती…

घूमते घूमते भीड़ में ना जाने क्यूं चेहरा तेरा तलाशने लगता हूँ मैं
पर एक बात तो पक्की है कि मुझे अब तुम्हारी याद नहीं आती…

मुझसे मिलने भी चली आती हो तुम कभी ख्यालों में तो कभी ख्वाबों मे पर
मुझे फ़िर भी अब तुम्हारी याद नहीं आती…

मैं जानता हूँ कि ना भूला पाऊँगा मैं तुझ को कभी
पर मुझे अब तुम्हारी याद नहीं आती…

मुझे अब तुम्हारी याद नहीं आती…
मुझे अब तुम्हारी याद नहीं आती ।

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एक ही नज़र में

एक ही नज़र में आप हमारे मेहमान बन गए
आप को पाकर हम खुशनसीब इंसान बन गए

दो बातें क्या की मुझसे वो सारा जहाँ बन गए
जो पास रहकर भी लोग हमारे न बन सके
दूर रहकर ए इश्क आप हमारी जान बन गए
मोहब्बत में आप तो ईमानदारी की मिसाल बन गए

नकमिओं ने और भी सरकश बना दिए
इतने हुए ज़लील के खुद्दार बन गए

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बेटियां गरीब की

बेटियां गरीब की जवान हो गयी ।
बदकिस्मती उसकी कदरदान हो गयी ।
गमो की दूप उसपे मेहरबान हो गयी ।
सितम उस पर कुदरत ने यह ध दिया ।
बेटियां गरीब की जवान हो गयी ।
अरमान पिले करे हाथ बेटी के वह ।
कैसे फ़र्ज़ अपना यह पूरा करे वह ।
पाई बांध चुनरी में हैं जिनकी बेशुमआर ।
उन बेटियो की शादी कैसे रचाये वह ।
ताने देता हैं सब कोई समझता नहीं ।
दर्द गरीब बाप का किसी को दीखता नहीं ।
आज पूछता हैं वह बाप एक सवाल इस समाज से ।
क्या गरीब के घर जनम लेना उसकी बेटियो का पाप था ।
बाप की यह हालत कब तक देखती बेटियां ।
वह भी खुद्दार बाप की थी बेटियां ।
जब सब्र का प्याला उनके भर गया ।
आँसू बाप की आखो में न देखा गया ।
एक साथ चढ़ गयी फसी बेटियां ।
किसने मार उन्हें कौन ज़िम्मेदार हैं ।
क्यू गरीब की बेतिया से तुम्हे नहीं प्यार हैं ।
सीने लगाकर पली थी उसके आँगन की कलियाँ थी वह ।
मर गयी आज तीनो कुदरत भी हमपे
शर्मसार हैं हो सके तो किसी गरीब बाप का सहारा बनना
मुसीबत के तूफ़ान में घिरे किसी घर का किनारा बनना

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आँखों में समाई रहती हैं

दिल में बसा कर उसका चेहरा खो गया मैं कहीं
जिसके बिना एक पल भी जीना मुश्किल था
धुंधली सी एक तस्वीर जिसकी,
आँखों में समाई रहती हैं.
नाम जिसका होंठों पर बसा हैं मेरे,
वो तुम ही तो हो, वो तुम ही तो हो.
धड़कन में जो बस्ती है मेरी,
साँसों मेी बसी हैं खुश्बू जिसकी.
बसी है मेरे जहॉं में उसकी ही तस्वीर हर कहीं

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बारिश के मौसम में

इस हसीन बारिश के मौसम में
तेरे प्यार मे दो पल की ज़िंदगी बहुत है,

एक पल की हँसी और एक पल की ख़ुशी बहुत है,
ये दुनिया या ना जाने, तेरी आँखे मूज़े पहचाने यही बहुत है.

हर तरफ खुशियों का मौसम हो.
जीने के सिर्फ़ दो ही रास्ते हैं
ज़रा समय निकल के देखो तेरे चाहने वाले बहुत हैं

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सागर की कहानी

सागर की कहानी, सागर वासियों की जुबानी…

मैंने जाना सागर आकर, हृदय यहाँ लोगों के सागर।

सागर सब भांति महान, ये बुंदेलखंड की जान।

बंबई में भी सागर प्यारा, पर ये मीठा और वो खारा।

पीलीकोठी में सजा है दादा दरबार, बोलो पहलवान बब्बा की जय-जयकार।

मोतीनगर चौराहे से जाकर अंदर, पूजिये भूतेश्वर शिव-शंकर।

अंजनी माता के बालाजी, मंगलगिरी पर हैं बालाजी।

मकरोनिया में है बना शिव-शक्ति धाम, शिव-शक्ति के वरदाता सागर नगर तमाम।

बारह ज्योतिर्लिंग यहाँ हैं, ऐसे तीर्थ और कहाँ हैं।

हैं सागर में जैनों के ठाठ, एक लाख यहाँ पर जैन हैं और मंदिर साठ।

झील यहाँ पर लाखा बंजारा, जल नहीं मिला तो खोदकर हारा।

बेटे-बहू का दे दिया तालाब के लिए बलिदान, इसलिए सागर महान।

जमना मिठ्या का नाम बड़ा है, चिरोंजी की बर्फी का दाम बड़ा है।

सागर में प्रसिद्ध है गुजराती नमकीन, सागर वाले है बड़े नमकीन के शौकीन।

सागर की पहचान हैं हरीसिंह गौर, हरीसिंह जी गौर जैसा नहीं कोई और।

यहीं पर जन्मे कवि पदमाकर, नमन करूँ उन्हें मैं जाकर।

सागर की महिमा है भारी, शब्दों में नहीं जाये उतारी।

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