मेरी जिंदगी एक आइना है

ये मेरी जिंदगी एक आइना है
देखो जरा तुम्हे क्या नज़र आया
खो जाता है अँधेरे में दिल अक्सर
पूछते हैं फिर की दर्द कहाँ से आया

झूठ का साथ देता नहीं मैं यूँ तो
क्यूँ तुम्हे इसमें नज़र प्यार आया
मैं तनहा जी नहीं सकता ऐसे
फिर क्यूँ तुझ पर ही प्यार आया

उसका हर वादा झूठा ही होगा
फिर भी उस पर ऐतबार आया
उसके कहा की तुम आइना हो
इसमें चेहरा मुझे अपना नज़र आया

इस जिन्दगी में न मिल सकेंगे हम
फिर भी क्यूँ तुम पर ही प्यार आया
प्यार पाकर भी तनहा हो गया मैं
फिर पूछते हैं की दर्द कहाँ से आया

Manish Vishwakarma
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