चाहकर भी किसी को भूल ना पाना

चाहकर भी किसी को भूल ना पाना मोहब्बत है

रह रहकर हर पल किसी का याद आना मोहब्बत है

किसी की पलकों पर सपने की तरह बस जाना मोहब्बत है

किसी की आँखो का आँसू बन जाना मोहब्बत है

जो तन्हाइयों मे भी साथ रहे वो मोहब्बत है

जो रुसवाइयों मे भी साथ चले वो मोहब्बत है

जो दर्दे-दिल को दावा दे वो मोहब्बत है

यार रूठे तो खुद को सज़ा दे वो मोहब्बत है

Shikha Sharma
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