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उसकी यादों का कारवां

शरारत उसकी और शरमाना क्या गजब था
बातों में उसकी मेरा नाम आना बेसबब था
खुदा ने मोहलत न दी कभी उससे मिलने को
पर इन्तजार में तडपना भी लगता शानदार था

उसकी यादों के कारवां में चलता चला गया में
एक गहरे दरिया में फश गया हो माँझी जैसे
हर पहर हर वक़्त में वो ही याद आती है
यादों के भँवर में फश गया हो समय जैसे

Ashish Vishwakarma
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