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इस बेनाम सी मोहब्बत को क्या नाम दूं

इस बेनाम सी मोहब्बत को क्या नाम दूं
जी करता है उनका ही दामन थाम जिंदगी गुजार दूं
बन के मेहमान दिल में जगह बनानी थी
अब सेर-ओ-आँखो मैं बैठा कर सरताज इन्हें नाम दूं

जब देखते है वो तो मेहताब सा शमां होता है
उनकी मौजूदगी से ही सारा आलम बनता है
इस नाचीज़ को उन से मोहब्बत बेहिशाब हो गयी
फिर यह मीरा अपने कान्हा की दाशी हो गयी

हम ने भले ही मोहब्बत की हो बेवफा से
पर ये पाकीज़ा मुहब्बत लोगों में आम हो गयी
माना की यह कहानी अधूरी रह गयी
पर खुदा की बंदगी तो देखो

मुझे प्यार की कहानी मैं आबाद कर गयी
यह बेनाम सी मुहब्बत हमें भले ही बदनाम कर गयी
पर इश्क़ का सरताज भी सर पर रख गयी
हाँ यह मोहबात-ए-शान हमें गली गली मशहूर कर गयी
यह बेनाम इस मुहब्बत हमारा नाम कर गयी

Harshita Shrivastav
Intelligent Shayar
She is intelligent, she is pretty, she has different prospective on everything... so enjoy her views on everything by her shayries...
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